ऋषि कटियार प्राचीन काल में जम्बूद्वीप के एक घने जंगल में गायतोंडे नाम का डाकू रहता था। वह चोरी, जेबकतरी, उगाही, वसूली, मटका, स्मगलिंग जैसे कामों में लिप्त था। बाद में उसने अपना कार्यक्षेत्र बढ़ाते हुए हवाला,आईपीएल, ब्लैकमनी आदि में भी पदार्पण किया और वैधानिक, राजनीतिक, न्यायिक व्यवस्था के सहयोग और अनुकंपा से अत्यंत सफल हुआ। फिर भी अपनी जड़ों से जुड़ा गायतोंडे नॉस्टैल्जिया के नाम पर कभी-कभी लूटपाट भी कर लेता था। एक दिन की बात है, दिन ढल चुका था, अंधेरा हो चुका था। मतलब एक रात की बात है। एक अधेड़ उम्र का हल्की दाढ़ी वाला व्यक्ति वहां से गुजर रहा था। गायतोंडे ने उसे घेर लिया। वह व्यक्ति अपने फोन से सेल्फी लेने में लगा हुआ था। गायतोंडे को देखते ही उसने विक्ट्री की मुद्रा में दो उंगलियां उठा दीं और पोज देने लगा। गायतोंडे ने कहा, 'सुनो, मैं गायतोंडे डाकू हूं। क्या तुम्हें मुझसे डर नहीं लगता? व्यक्ति ने कहा, 'मुझे किस बात का डर है? यह फोन चाइनीज है। कैश पूरे देश में नहीं है। खाता स्विस है। फकीर आदमी हूं। झोला उठा के निकला हूं। तुम मुझसे क्या ले लोगे?' गायतोंडे ने कहा, 'आया हूं, ...